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खुशियाँ जाने वह कहाँ चली गई।
बस नौकरी याद आती है।
दिन - रात दिल परेशान होता, सपने में बॉस की डांट सुनाई देती हैं।।
क्या कहूँ कुछ समझ न आता, मन ऐसे विकल हुआ जाता है।
पैसे से तो सामान मिल ही जाती हैं, बस खुशियाँ कहां से लाऊँ।
जब नौकरी नहीं तब भी परेशान और जब है तब भी।
कभी सपने नहीं तो सभी अपने नहीं।
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